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गोयनेश्वर पर्वत महादेव मंदिर गोयना भाखर डंडाली सिणधरी बाड़मेर राजस्थान | Goyneswar mhadev

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 गोयनेश्वर पर्वत महादेव मंदिर गोयना भाखर डंडाली सिणधरी बाड़मेर राजस्थान |Goyneswar mhadev

 

Goyneswar mhadev mandir
goyneswar parvat

गोयनेश्वर महादेव मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के बाड़मेर जिले के सिणधरी शहर से 18 किलोमीटर दूर डंडाली गांव के पास स्थित एक विशाल पर्वत है।

इस पर्वत का नाम गोयनेश्वर पर्वत है। गोयनेश्वर पर्वत की सबसे ऊंची चोटी पर भगवान शिवजी की प्रतिमा स्थित है और पर्वत के आंगन में भगवान शिवजी का प्राचीन मंदिर है। यहां पर हर सोमवार को मेले जैसा माहौल रहता है ।महाशिवरात्रि को यहां पर भरपूर मेला लगता है मेले में लोग दूर-दूर से आते हैं।

Mhadev mandir goyna bhaker
Mhadev mandir

गोयना पर्वत में दर्शनीय स्थल

महादेव जी का मंदिर । श्री रावल गुलाब सिंह जी की प्रतिमा । गणेश जी मंदिर । गोशाला । रावल श्री गुलाब सिंह जी की कोटडी । और पूरे पर्वत में भगवान के दर्शन

Rawal gulabsingh ji ka mandir

 गोयना दर्शन

 सबसे पहले भगवान शिव जी का मंदिर है और पास में ही रावल श्री गुलाब सिंह जी की प्रतिमा और थोड़ी दूरी पर श्री गणेश जी का मंदिर स्थित है गणेश जी मंदिर के सामने श्री रावल गुलाब सिंह जी की कोटड़ी है और गोयनेश्वर पर्वत की सबसे ऊंची चोटी पर भगवान शिव जी का स्थान और पूरे पर्वत में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हैं ।

Shiv ling
Shiv ling

वीडियो देखें

यहां पर दर्शन करने के लिए लोग पर्वत पर चढ़ते हैं

और सब देवी देवताओं के दर्शन करते हुए गोयनेश्वर पर्वत के शिखर पर स्थित शिव जी की प्रतिमा के भी दर्शन करने जाते हैं

पर्वत पर चढ़ते हुए थोड़ी सावधानी जरूर रखनी पड़ती है यह एक बहुत ही बड़ा पर्वत है इस पर्वत को स्थानीय लोग गोयना भाखर के नाम से भी पुकारते हैं यह एक पहाड़ी इलाका है गोयना पर्वत से थोड़ी ही दूरी पर लूनी नदी चलती है।

Gulab Singh ji garh Sindhari
Rawal gulabsingh ji ki kotdi

रावल श्री गुलाब सिंह जी 

श्री रावल गुलाब सिंह जी गढ़ ठिकाना सिणधरी के महारावल थे श्री गुलाब सिंह जी का भक्ति से काफी लगाव

था और उन्होंने यहा गो सेवा की और आज यहां बड़ी गौशाला है और श्री रावल गुलाब सिंह जी की कोटड़ी है और पूजनीय श्री गुलाब सिंह जी की प्रतिमा है इनके दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं

Mhadev gosala
Mhadev Gosala

 गोयनेश्वर पर्वत कैसे जाएं

अगर आप भारत के कोई भी राज्य से हो तो सबसे पहले आपको राजस्थान के बाड़मेर जिले के सिणधरी शहर में आना होगा 

Goyna bhaker shiv mandir
Gufa

सिणधरी आने के लिए जोधपुर बाड़मेर गुजरात से सीधी बस सेवा है। सिणधरी से गोयनेश्वर पर्वत के लिए बस टैक्सी मिल जाती है

यहा आने का सही समय

यहां पर वैसे तो हर सोमवार को मेले जैसा ही माहौल रहता है। लेकिन महाशिवरात्रि के समय यहां पर महत्वपूर्ण मेला रहता है

आसपास दर्शनीय स्थल

अमरनाथ महादेव चेतन गुफा और गोगावाड़ी

Goyna bhaker
Ganesh ji temple

नाहरगढ़ का किला – Nahargarh fort jaipur history in hindi

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 Nahargarh fort history in hindi – नाहरगढ़ का किला जयपुर राजस्थान 

Nahargarh fort history in hindi

Nahargarh fort hindi: नाहरगढ़ का किला राजस्थान की राजधानी और पिंक सिटी जयपुर में स्थित है। यह किला अरावली पर्वत पर बना हुआ है। जयपुर में तीन प्रमुख कीले हैं। जिसमें आमेर का किला जयगढ़ का किला और नाहरगढ़ का किला है।

पहले इस किले का नाम सुदर्शन गढ़ था लेकिन बाद में इस किले को नाहरगढ़ का किला नाम से जाने जाना लगा

नाहरगढ़ किले का निर्माण जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने सन 1734 ईस्वी में करवाया

यह किला चारों और से दीवारों से घिरा हुआ है कहा जाता है कि यह किला पहले आमेर की राजधानी हुआ करता था कहा जाता है इसके किले पर कभी आक्रमण नहीं हुआ था लेकिन इस किले में ऐतिहासिक घटनाएं घटी हुई है जो आज भी यादगार हैं नाहरगढ़ किले में की गई कारीगरी देखने लायक है

नाहरगढ़ किले की जानकारियां – best tourist places in nahargarh fort jaipur hindi

सन 1857 की भारत विद्रोह के समय यूरोपियन लोगों को राजा सवाई राम सिंह जी ने उनकी सुरक्षा के लिए नाहरगढ़ किले में भेजा था । कहा जाता है नाहरगढ़ किले का नाम नाहर सिंह भोमिया के नाम पर ही रखा गया था नाहरगढ़ किले में बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों की शूटिंग हुई है ।नाहरगढ़ किले में देशी और विदेशी पर्यटक हमेशा आते रहते हैं

 जयपुर में देखने लायक प्रमुख पर्यटन स्थल – top tourist places in Jaipur rajsthan hindi

 आमेर का किला, जयगढ़ का किला, नाहरगढ़ का किला,हवा महल, सिटी पैलेस, जल महल, बिरला मंदिर, इत्यादि

जयपुर कैसे जाएं – how to reach jaipur rajasthan hindi

भारत के प्रमुख शहरों से जयपुर के लिए हवाई यात्रा रेल बस की सुविधा है  

चंबा हिमाचल प्रदेश कैसे जाए संपूर्ण जानकारी हिंदी में / chamba Himachal Pradesh guide hindi

 चंबा हिमाचल प्रदेश कैसे जाए संपूर्ण जानकारी हिंदी में / chamba Himachal Pradesh guide hindi

चंबा हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत पर्यटक स्थल है।

चंबा हिमाचल प्रदेश कैसे जाए संपूर्ण जानकारी हिंदी में
चंबा हिमाचल प्रदेश

रावी नदी के किनारे पर एक समतल पहाड़ी पर बसा चंबा बेहद खूबसूरत पर्यटक स्थल है। डलहौजी से इसकी दूरी 56 किलोमीटर और समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 996 मीटर है। चंबा को यह सौभाग्य प्राप्त है कि यहां एक से बढ़कर एक लोकप्रिय धार्मिक व कृपालु राजाओं ने शासन किया था। तभी यहां की संस्कृति ना केवल फली फूली अपितु चंबा की सीमाओं को पार करके संपूर्ण भारतवर्ष में फैली है। चारों ओर से बर्फ से ढकी पहाड़ियों पर स्थित चंबा में शिव पार्वती के 6 मंदिर है। इन मंदिरों की बेजोड़ नक्काशी और कला के नमूने पर्यटकों को मंत्र मुक्त कर देते हैं। चंपा के वृक्षों से घिरा चंबा 10 वीं सदी के राजा साहिल की बेटी चंपावती के नाम पर बसा हुआ है। यहां पूरे साल भर रौनक लगी रहती है। जगह-जगह मेले आयोजित किए जाते हैं। सबसे प्रसिद्ध यहां का भिजार त्यौहार मेला है। यह मेला हर साल सावन के तीसरे रविवार को आयोजित किया जाता है। इसके अलावा अप्रैल माह में आयोजित होने वाला सूही मेला भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। चंबा प्रकृति की तमाम अदाओं का साक्षी है। और इसकी हर अदा पर्यटक को अभिभूत कर देती है। यहां की घाटियों में जब धूप के रंग बिखरते हैं तो इसका सौंदर्य कुछ अलग ही नजर आता है। वास्तुकला हो या भित्तिचित्र मूर्तिकला हो या काष्ठकला जितना प्रोत्साहन इन्हें चंबा में मिला है उतना शायद ही देश के किसी अन्य हिस्से में मिला हो । 

चंबा में देखने लायक स्थान : Best tourist places to visit in chamba

भूरी सिंह संग्रहालय । लक्ष्मी नारायण मंदिर । सलूनी । भरमौर। सहो । सरोल। चौगान । मणिमहेश। पांगी घाटी । छतराड़ी। अखंड चंडी महल और रंग महल। 

भूरी सिंह संग्रहालय : Bhuri Singh Museum Chamba Himachal Pradesh

यह संग्रहालय भारत के 5 प्रमुख संग्रहालय में से एक है। यहां चंबा घाटी की कला देखने को मिलती हैं। इस संग्रहालय का निर्माण चंबा नरेश भूरी सिंह ने डच डॉक्टर बोगले की प्रेरणा से करवाया था । इस संग्रहालय में 5 हजार से अधिक दुर्लभ कलाकृतियां संग्रहित है। इन कलाकृतियों में विभिन्न चित्र मूर्तियां पांडुलिपिया और धातुओं से निर्मित वस्तुओं के अलावा विश्व प्रसिद्ध चंबा रुमाल भी है। 

लक्ष्मी नारायण मंदिर : Laxmi Narayan temple in Chamba Himachal Pradesh

यह प्राचीन मंदिर शिव और भगवान विष्णु की कलात्मक प्रतिमाओं और बेजोड़ नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।

सलूनी : Saluni Himachal Pradesh

चंबा से 56 किलोमीटर दूर समुद्र तल से 1829 मीटर ऊंचा यह पर्यटन स्थल अपने मनोरम दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है।

भरमौर : Bharmor Himachal Pradesh

चंबा से 65 किलोमीटर दूर यह पर्यटन स्थल प्रसिद्ध मणिमहेश यात्रा का आरंभ है यहा के चोरासिया मन्दिर समूह विशेष रूप से दर्शनीय है। 

सहो : Saho Chamba Himachal Pradesh travel in hindi

साल नदी के तट पर स्थित यह स्थल चंद्रशेखर मंदिर के लिए विख्यात है चंबा यहां से 20 किलोमीटर दूर है।

सरोल : Sarol Chamba Himachal Pradesh travel

चंबा से 11 किलोमीटर की दूरी पर एक घाटी में बसा सरोल एक सुंदर पर्यटन एवं पिकनिक स्थल है। यह रावी नदी के दाएं किनारे पर स्थित है। यहां पर्यटक कृषि फार्म और अन्य वन संबंधी जानकारियां प्राप्त करते हैं।

चौगान : Chaugan Chamba Himachal Pradesh

चौगान अपने मेलों के लिए पर्यटकों की नजर में विशेष स्थान रखता है। यह एक आम व्यापारिक स्थल है। यहां होने वाली विशेष संस्कृति गतिविधियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। 

मणिमहेश : Manimahesh Lake Chamba Himachal Pradesh

भरमौर से 34 किलोमीटर दूर 4170 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह जगह अपनी 5656 मीटर ऊंची मणिमहेश चोटी के लिए विख्यात है। इसके अलावा यहां प्रसिद्ध मणिमहेश झील भी दर्शनीय है। यहां प्रतिवर्ष अगस्त सितंबर महीने के दौरान मणिमहेश यात्रा आयोजित की जाती है।

पांगी घाटी : Pangi Ghati Chamba Himachal Pradesh

2438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चंबा से 137 किलोमीटर दूर यह लुभावनी घाटी अपने प्राकृतिक सौंदर्य भोले भाले लोगों को उनके विभिन्न लोक नृत्य के लिए प्रसिद्ध है। पर्वतारोहियों और ट्रैकिंग करने वालों के लिए यह एक रोमांचकारी जगह है।

छतराड़ी : Chhatradi Chamba Himachal Pradesh

भरमौर से 40 किलोमीटर दूर छतराड़ी शक्तिदेवी मंदिर के लिए विख्यात है। जो पुरातत्व में रुचि रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण जगह है।

अखंडचंडी महल और रंग महल : Akhandchandi Mahal and Rang Mahal Chamba Himachal Pradesh

चंबा की कलात्मक धरोहर मे यहां के अखंडचंडी महल और रंग महल को भी शामिल किया जा सकता है। रंग महल में इस समय हिम्मत सल हस्तकला निगम का कार्यालय है।

चंबा कैसे जाएं कहां रुके और कितना खर्चा : How to reach Chamba, where to stay and how much does it cost

रेल मार्ग :

चंबा का निकटतम रेलवे स्टेशन पठानकोट है जो 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देश के प्रमुख महानगरों से पठानकोट के लिए सीधी रेल सेवाएं उपलब्ध है।

सड़क मार्ग :

यहां जाने के लिए सड़क मार्ग ही सबसे बढ़िया है। यहां के लिए चंडीगढ़ दिल्ली अमृतसर शिमला जम्मू पठानकोट आदि शहरों से साधारण व डीलक्स बस सेवाएं उपलब्ध है।

चंबा कब जाना चाहिए :

मार्च से जून व सितंबर से नवंबर तक मौसम चंबा की वादियों में घूमने के लिए उत्तम है।बरसात के मौसम में चंबा में कई बार भू संकलन की वजह से रास्ता जाम हो जाता है । इसलिए बरसात के दिनों में आपको चंबा जाने का प्रोग्राम रद्द करना चाहिए मार्च से जून तक आप को गर्म कपड़े ले जाने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इन दिनों यहां का मौसम खुशगवार होता है। सितंबर से नवंबर तक की अवधि में यदि आप चंबा जाए तो अपने साथ गर्म कपड़े अवश्य ले जाएं क्योंकि रात को यहां बहुत ही ज्यादा ठंड पड़ती है।

कहां रुके :

चंबा में आपको रुकने के लिए 4000 से 6000 प्रतिदिन किराए वाली होटल उपलब्ध है। यहां पर कुछ धर्मशालाएं भी है जो रूकने के लिए उचित स्थान है।

चंबा में ठहरने के लिए होटल यहां पढ़ें

डलहौज़ी कैसे पहुंचे सम्पूर्ण जानकारी । हिल स्टेशन । dalhousie kese jaye hindi

डलहौज़ी कैसे पहुंचे सम्पूर्ण जानकारी । हिल स्टेशन । dalhousie kese jaye hindi

डलहौज़ी कैसे पहुंचे
डलहौज़ी 

डलहौजी हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत शहर है समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 2036 मीटर है इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का श्रेय अंग्रेजों को जाता है अंग्रेज यहां की प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मुग्द हो उठे थे लॉर्ड डलहौजी को भी यह स्थान बेहद प्रिय था तभी इस स्थान का नामकरण डलहौजी के रूप में हुआ ।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी के आंदोलन के दौरान 5 महीने डलहौजी में गुजारे थे । भारत के महानतम कवि श्री रविंद्र नाथ टैगोर जी ने भी सन 1883 में यहा एक माह गुजारा था और यहां के रमणीय वातावरण में रम कर गई कविताओं की रचना की थी । शहीद भगत सिंह जी के चाचा अजीत सिंह के साथ भी इस स्थल की यादें जुड़ी हुई है । प्रसिद्ध पंजाबी साहित्यकार नानक सिंह जी ने भी डलहौजी में साहित्य सृजन के लिए अपना काफी समय बिताया था । डलहौजी हिमाचल प्रदेश के चंबा घाटी का प्रवेश द्वार माना जाता है । यहां कदम रखते ही सैलानी यहां के प्राकृतिक वातावरण में रम जाता है और उसे एक आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है । यहा आने वाले पर्यटक को कभी गगनचुंबी पर्वत आकर्षित करते हैं तो कभी घाटियों के सीने पर बने कलात्मक घर अपनी और आने के लिए विवश करते हैं कभी झरनो का संगीत मदमस्त कर देता है तो कभी शीतल हवा के झोंके ताजगी का अहसास कराते हैं यहां से पंजाब के कुछ मैदानी इलाकों के साथ-साथ कश्मीर क्षेत्र की विशालकाय हिमानी चोटियों को भी देखा जा सकता है ।

डलहौजी में घूमने लायक प्रमुख स्थान – Top places to visit in Dalhousie

पंजपुला, डायना कुंड, कालाटॉप, सतधारा, झंदरीघाट, और खजियार ।

पंजपुला : Panjpula Dalhousie

डलहौजी के अजीत सिंह रोड पर स्थित पंजपुला एक रमणीक स्थल है । पांच छोटे पुलों के नीचे बहती जलधारा के कारण इसका नाम पंजपुला पड़ा है । यहा पर एक बहुत ही खूबसूरत प्राकृतिक जलकुंड है जो दर्शनीय हैं । इसके अलावा या क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह की समाधि भी देखने योग्य है ।

डायना कुंड : Dyna kund Dalhousie in hindi

यह शहर की सबसे ऊंचाई पर स्थित एक बेहद खूबसूरत पर्यटक स्थल है। यहां से रावी, व्यास और चीनाव नदियों को बहते हुए देखना बड़ा मनमोहक लगता है। यहां पहुंच कर ऐसा लगता है जैसे आसपास के पहाड़ छोटे पड़ गए हो वास्तव में यहा की प्रकृति कुछ अलग ही देखने को मिलती है।

सतधारा : Satdhara Dalhousie hindi

सतधारा डलहौजी पंचपुला मार्ग पर स्थित एक जलप्रपात है 

इसका पानी अत्यंत स्वच्छ और रोग निवारक है इस धरने में कभी छोटी-छोटी सात धाराएं गिरती थी इसी वजह से इसे सतधारा के नाम से जाना जाता है।

झंदरीघाट : Jhandri Ghat Dalhousie Hindi

पुरातात्विक स्थलों में रुचि रखने वाले पर्यटक इस स्थल पर अवश्य जाते हैं। यहा पुराने महलों के खंडहर और अन्य पुरानी इमारतें देखी जा सकती है । पिकनिक के लिए यह अच्छा स्थान है।

कालाटॉप : Kalatop Dalhousie hindi

यहां पर बांस चीड़ व देवदार के वृक्षों के मध्य में स्थित यह पर्यटन स्थल बेहद आकर्षक है । यहा पर पर्वतीय पंछियों की चर्चा हट मन मोह लेती है।

खजियार : khajjiar Dalhousie Hindi

डलहौजी से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खजियार मिनी स्विट्जरलैंड व मिनी गुलमर्ग के नाम से जाना जाता है

यहां प्रकृति अपने पूरे शबाब पर दिखाई देती हैं। यहां एक तश्तरीनुमा झील है। जो 1.5 किलोमीटर लंबी है। सर्दियों में खजियार जब बर्फ की सादर ओढ़ता है तो यहां का सौंदर्य गजब का लगता है । यहां झील किनारे पहाड़ी शैली में बना एक मंदिर भी है जिसमें नाग देवता की प्रतिमा स्थापित है

डलहौजी कैसे पहुंचे । Dalhousie kaise jaye

वायु मार्ग ।।

वायुमार्ग से पहुंचने के लिए यहां का निकटतम हवाई अड्डा गग्गल, कांगड़ा है, जो लगभग 124 किमी दूर स्थित है।

रेल मार्ग :

यहा आने के लिए पठानकोट तक देश के किसी भी हिस्से से रेल द्वारा पहुंचा जा सकता है । पठानकोट से डलहौजी 78 किलोमीटर दूर है । यहां के लिए अमृतसर दिल्ली चंडीगढ़ जम्मू आदि शहरों से सीधी रेल सेवाएं उपलब्ध है ।

सड़क मार्ग :

डलहौजी के लिए पठानकोट से होकर रास्ता जाता है इस रूट पर नियमित बस सेवाएं उपलब्ध है।

कब जाएं :

डलहौजी में गर्मियों मे मौसम बड़ा सुहावना होता है। सर्दियों में यहा हिमपात का दृश्य देखते ही बनता है। बरसात के मौसम को छोड़कर यहा कभी भी जाया जा सकता है। सर्दियों में गर्म कपड़े लेकर जाना जरूरी है ।

कहां ठहरे :

यहां पर ठहरने के लिए आपको 1500 से 5000 तक किराए में अलग-अलग होटल और गेस्ट हाउस सुविधा उपलब्ध है ।

डलहौजी में ठहरने के लिए होटल यहां पढ़ें

थार का रेगिस्तान और कच्छ का रण | Jaisalmer to sam distance by road

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 थार का रेगिस्तान और कच्छ का रण | Jaisalmer to sam distance by road guide in hindi

Jaisalmer to sam distance by road

वो कहते हैं ना गुजरात में अगर आपने कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा उसी तरह आप अपने राजस्थान में थार का रेगिस्तान नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा

सम और जैसलमेर के बीच का नजारा कुछ अलग ही है 

Thar desert jesalmer

सम से जैसलमेर को जाने वाली रोड पर हर जगह बाहर से आए हुए पर्यटक आनंद लेते दिखेंगे थर डिजर्ट में एक तरफ रेत के टीले हैं और दूसरी तरफ थार रण इस रण में भारत का सबसे बड़ा पवन चक्की प्लांट है

यहां आने का सही समय 

अक्टूबर से फरवरी तक सर्दियों के समय

वीडियो देखें

कैसे आए 

जैसलमेर से आपको प्राइवेट बस टैक्सी या अपनी कार या बाइक द्वारा भी आ सकते हैं

और देखने लायक स्थान

सम का रेगिस्तान लोंगेवाला युद्ध स्थल मातेश्वरी तनोट राय मंदिर भारत-पाकिस्तान बॉर्डर

थार का रेगिस्तान
Jaisalmer
Jaisalmer Rajasthan

आमेर का किला जयपुर राजस्थान / Aamer fort history in hindi

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 आमेर का किला जयपुर राजस्थान / Aamer fort jaipur travel guide in hindi

Aamer fort jaipur rajasthan

आमेर का किला गुलाबी शहर जयपुर में बसा है | आमेर किला भारत के सबसे बड़े किलो में से एक है | जयपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर अरावली पर्वत पर स्थित यह किला राजस्थान की शान है इस किले का निर्माण जयपुर के राजा मान सिंह जी ने करवाया था यह किला राजस्थान के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है

Aamer fort jaipur rajasthan

 इतिहास 

इतिहासकारों से पता चलता है कि आमेर के किले का निर्माण राजस्थान राजपूत राजवंश राजा मान सिंह जी ने 16 वी शताब्दी में करवाया था और समय-समय पर विकास होता रहा 1727 में राजा सवाई सिंह जी द्वितीय ने अपने शासनकाल में आमेर से जयपुर को राजधानी बनाया

 आमेर किले तक कैसे पहुंचे

 सबसे पहले जयपुर आना होगा जयपुर रेलवे स्टेशन से बस टैक्सी आसानी से मिल जाती है

सोनार का किला जैसलमेर | Golden Fort Jaisalmer travel guide hindi

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 सोनार का किला जैसलमेर | Golden Fort Jaisalmer

Jaisalmer fort, sonar ka killa

Golden fort-जैसलमेर का किला पूरी दुनिया का एक खूबसूरत पर्यटक स्थल है सोनार का किला के नाम से मशहूर यह जैसलमेर का किला भारत के सबसे बड़े किलो में से एक हैं थार के रेगिस्तान के सुनहरे हिस्से में होने के कारण इस किले को सोनार का किला और गोल्डन फोर्ट के नाम से जाना जाता है इस किले में कई बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हुई है सन 1965 और सन 1971 में हुई भारत पाकिस्तान की लड़ाई में भी इस किले का अहम योगदान ह

Sonar killa jaisalmer

इतिहास

 सोनार का किला के नाम से मशहूर यह किला थार मरुस्थल जैसलमेर शहर के बीचों बीच स्थित है जैसलमेर की त्रिकुटा की पहाड़ी पर बने इस किले को सन 1156 ईस्वी में राजपूत शासक रावल जैसल द्वारा बनवाया गया था इस किले के निर्माण को लेकर कई ऐतिहासिक घटनाएं जुड़ी हुई है

इतिहास के मुताबिक गोर के शासक उन दीन मोहम्मद ने अपने राज्य को बचाने के लिए जैसलमेर के शासक को अपने एक षड्यंत्र में फंसा कर आक्रमण कर दिया और पूरे किले को लूट लिया और पूरे किले को ध्वस्त कर दिया

इसके बाद रावल जैसल ने त्रिकुटा की पहाड़ी पर दूसरा किला बनवाया हालांकि इस किले पर भी रावल का ज्यादा समय नहीं बिता और दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने उन पर आक्रमण कर दियाऔर रावल जैसल को पराजय का सामना करना पड़ा इसके बाद करीब 8 – 9 साल तक अलाउद्दीन खिलजी का इस किले पर शासन रहा इसके बाद मुगल शासक हुमायूं ने दूसरा हमला किया मुगल शासकों की ताकत को देखकर रावल ने मुगलों से दोस्ती कर ली

और रावल ने अपनी बेटी का विवाह मुगल शासक अकबर से करवा दिया मुगल शासन काल 1762 ईस्वी तक इसके लिए पर मुगलों का शासन रहा इसके बाद जैसलमेर किले पर महाराजा मूलराज ने अपना अधिकार कर लिया

Fort of jaisalmer rajasthan

कैसे आए

 जैसलमेर आने के लिए हवाई मार्ग बस कार ट्रेन सब सुविधाएं मौजूद है

मेहरानगढ़ किला जोधपुर राजस्थान / Mehrangarh fort jodhpur history in hindi

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 मेहरानगढ़ किला जोधपुर राजस्थान

राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित मेहरानगढ़ किला भारत के सबसे बड़े किलो में से एक है

Mehrangarh fort jodhpur travel guide in hindi

Mehrangarh fort jodhpur history in hindi

मेहरानगढ़ किले का निर्माण मारवाड़ की राठौड़ राजवंश के 15 वे शासक महाराजा राव जोधा जी ने संत 1459 ईस्वी में करवाया था |

जोधपुर शहर की 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर बने इस किले को मजबूत दीवारों से बनाया गया है | 

मेहरानगढ़ किले की जटिल और जालीदार की गई नक्काशी देखने लायक है | इस किले में कई महल है |मेहरानगढ़ किले की छत से पूरा सूर्यनगरी शहर जोधपुर दिखता है |

 इतिहास 

मेहरानगढ़ किले का इतिहास 500 साल पुराना है | 

इस किले का निर्माण राव जोधा जी ने सन 1459 इसी में शुरू किया और सन 1638-78 में महाराजा जसवंत सिंह जी ने पूरा किया |

इस किले के बारे में कहा जाता है कि यह एक बार जोधपुर शासक पहाड़ियों पर घूमने निकले और पहाड़ी पर उन्होंने एक बाघ से बकरी को लड़ते देखा उस नजारे को देखने के बाद जोधपुर के शासक के मन में इस जगह पर किला बनाने का ख्याल आया |

इस पहाड़ी पर एक साधु महात्मा जी तपस्या करते थे और पास में ही एक पानी का तालाब था | जोधपुर शासक ने जब किले का निर्माण करना शुरू किया तब साधु महात्मा को यहां से जाने के लिए कहा तब साधु महात्मा ने एक श्राप दे दिया कि आप मुझे इस पानी के लिए यहां से जाने को बोल रहे हो यह पानी सूख जाएगा | इसके बाद यहां पानी सूखने लगा तब से आसपास के इलाकों में पानी की लगातार कमी होने लगी तब जोधपुर शासक साधु महात्मा से माफी मांगी महात्मा जी ने कहा यह श्राप तभी खत्म होगा जब इस किले की नींव में राज्य का कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से बलि दे तो | 

इसके बाद मेघवाल समाज के राजा राम मेघवाल आगे आए और इस किले की नींव में जिंदा बलि दी आज भी किले में राजा राम का स्मारक और बली की तारीख और अन्य जानकारियां लिखी है |  

महल

किले के अंदर शानदार ढंग से सजे हुए कई महल है मोती महल फूल महल शीश महल दौलत खाना सिलेह खाना इत्यादि 

संग्रहालय 

किले के संग्रहालय में रखे राजा महाराजाओं के जमाने के शाही शस्त्र हाथियों होदे शाही तलवारे और मारवाड़ की चित्र शैली इत्यादि |

चामुंडा माताजी का मंदिर 

मेहरानगढ़ किले में मां चामुंडा का भव्य मंदिर है मां चामुंडा राठौड़ राजवंश की कुलदेवी है दशहरे के समय यहां मेला लगता है |

कैसे पहुंचे

मेहरानगढ़ तक पहुंचने के लिए जोधपुर रेलवे स्टेशन से टैक्सी या ऑटो मिल जाते हैं या अपनी खुद की कार या बाइक से भी जा सकते हैं